आयुष्मान भारत: दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना के रूप में भारत की उपलब्धि

आयुष्मान भारत: दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना के रूप में भारत की उपलब्धि

सर्वजन स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में ऐतिहासिक कदम

भारत की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहल “आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)” ने एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। यह अब दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य योजना बन चुकी है। इस योजना के तहत देश के सबसे कमजोर वर्गों को हर वर्ष प्रति परिवार ₹5 लाख तक का नि:शुल्क स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार बिना आर्थिक बोझ के मिल रहा है।

23 सितंबर 2018 को शुरू हुई यह योजना भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को जमीनी स्तर पर बदल रही है। इसका मूल उद्देश्य है कि किसी भी परिवार को इलाज के खर्च के कारण आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

अभूतपूर्व पहुंच और प्रभाव

अक्टूबर 2025 तक देशभर में 42 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 86 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने योजना का लाभ उठाया है, जिससे बुजुर्गों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा की नई गारंटी मिली है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25 के अनुसार, इस योजना ने अब तक लाभार्थियों को ₹1.52 लाख करोड़ से अधिक की जेब से खर्च होने वाली स्वास्थ्य लागत से बचाया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आयुष्मान भारत न केवल चिकित्सा सेवाएं दे रहा है बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिरता भी सुनिश्चित कर रहा है।

33,000 से अधिक अस्पतालों का विशाल नेटवर्क

इस योजना के अंतर्गत देशभर में 33,000 से अधिक अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें 17,685 सरकारी और 15,380 निजी अस्पताल शामिल हैं। ये अस्पताल गरीब और कमजोर परिवारों को मुफ्त या अत्यधिक रियायती दरों पर इलाज उपलब्ध कराते हैं।

वर्तमान में 12 करोड़ से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार यानी लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना के पात्र हैं। इनके लिए 1,600 से अधिक बीमारियों और उपचार प्रक्रियाओं को कवर किया गया है — जिनमें सर्जरी, डायग्नोस्टिक जांच और फॉलो-अप सेवाएं भी शामिल हैं।

सिर्फ बीमा नहीं, एक व्यापक स्वास्थ्य अभियान

आयुष्मान भारत योजना केवल स्वास्थ्य बीमा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवर्तन मिशन है। यह प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक — तीनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को जोड़ती है।

इसके चार प्रमुख स्तंभ हैं:

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM)
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)
  • प्रधानमंत्री–आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)
  • प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)

ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य का नया आधार: आयुष्मान आरोग्य मंदिर

पूर्व में “हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर” कहलाने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में इन केंद्रों ने गैर-संचारी रोगों, दंत, नेत्र, ईएनटी (कान-नाक-गला), पैलियेटिव केयर और आपातकालीन सेवाओं को सुलभ बनाया है।

टेलीमेडिसिन की सुविधा के माध्यम से मरीज अब दूरस्थ डॉक्टरों से भी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। सितंबर 2025 तक इन केंद्रों के माध्यम से 39 करोड़ से अधिक टेली-परामर्श किए जा चुके हैं — जो डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति का प्रतीक हैं।

डिजिटल स्वास्थ्य की ओर कदम: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) भारत में एक राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) यानी एक अद्वितीय डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या दी जा रही है। इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से सभी अस्पतालों, क्लीनिकों और लैब से जुड़े रहते हैं।

अब तक 80 करोड़ से अधिक ABHA IDs जारी की जा चुकी हैं, जिनमें 6.7 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। यह पहल स्वास्थ्य सेवा को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बना रही है।

भविष्य की तैयारी: स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाना

प्रधानमंत्री–आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) को 25 अक्टूबर 2021 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों को सुदृढ़ करना है।

₹64,180 करोड़ की कुल लागत से 2021–2026 की अवधि में चल रहे इस मिशन के तहत ₹54,205 करोड़ राज्य स्तरीय परियोजनाओं और ₹9,340 करोड़ केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस मिशन से न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि महामारी जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी भी मजबूत होगी।

सरकारी सहयोग और वित्तीय प्रतिबद्धता

यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त वित्तपोषण से संचालित होती है। केंद्रीय बजट 2025–26 में ₹9,406 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो अब तक का सबसे अधिक आवंटन है।

इसके अतिरिक्त, 2022–23 से 2024–25 के बीच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ₹5,000 करोड़ से अधिक की राशि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विकास और संचालन पर खर्च की है।

वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में भारत की पहचान

आज आयुष्मान भारत केवल भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा सार्वभौमिक स्वास्थ्य मॉडल बन गया है। यह योजना दिखाती है कि डिजिटल नवाचार, संस्थागत सुदृढ़ता और वित्तीय सुरक्षा को मिलाकर कोई भी विकासशील देश समान और समावेशी स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर सकता है।

भारत का यह संदेश स्पष्ट है — स्वास्थ्य सेवा कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
आयुष्मान भारत इसी सिद्धांत को व्यवहार में लाने की दिशा में विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।

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